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Amrit Sagar

 Born in 1984 & Studied in Bihar, Belongs to a Bengoli Kayastha Cultured Family, Living in Delhi since last 10 Years with Family Members, Started to written poem after my Matriculation Exam.... Read More

Monday, 19 May 2014 08:58

कि पूजा मैं नहीं करता, नहीं जाता हूँ मंदिर में,

कहाँ कब चैन मिलता है, कभी किसी और के घर में,

कि जिनके घर में माँ बैठी, ख़ुशी, सुख-चैन से सागर,

उसी का घर तो मंदिर है, उसी का घर है मंदिर में !!

न मंदिर है, न मस्ज़िद है, नहीं काबा, न काशी है,

बिना बोले, समझ लेती, वो ममता, माँ की कैसी है,

Pawan Mishra

व्यवसाय से यांत्रिक अभियंता और चुनाव से कवि एवं लेखक होना मात्र संयोग नहीं... Read More

Thursday, 21 August 2014 16:34

होगा हिंदुस्तान नया

पलट जायेगा तख़्त तुम्हारा 
रक्त अगर हुंकारेगा 
महक उठेगी धरती फिर से 
वक़्त अगर स्वीकारेगा

पिघल उठेगी सत्ता की गलियां 
फिर चाँद सितारों से 
जब जब लहू उबल उठेगा 
फिर से लाख हजारों में

स्वाति की बूंदों को पीने 
फिर चातक पगलायेंगे 
सुलग उठेगी चिंगारी जब
हम ललकार उठाएंगे

हर पल कल कल दिल में हलचल 
फिर से है ईमान जगा
हर दिल थम थम फिर से करतल 
करते करते रात जगा

कहते कहते सहते सहते 
कितनी काली रत घटी
हर पल मौसम फिर बदलेगा 
ऐसे मन में आस जगी

अपनी मिटटी की रक्षा को 
फिर वो हाथ उठाएंगे 
फिर लहराएगा वो झंडा 
केसरिया फहराएंगे

अमन चैन की नींद सो सके 
ऐसा सपना बुनते हैं 
देशभक्ति की ज्वाला बरसे 
ऐसे माला जपते हैं

 

नित दिन किसी दिन छम छम होगी 
उमड़ेगा तूफ़ान नया 
फिर से प्रेम की धरती होगी 
होगा हिंदुस्तान नया …. .................पवन मिश्रा

Vishal Kumar Maurya

Myself Vishal Kumar Maurya , presently studying in Zakir Husain Delhi college, University of Delhi for the course B.Tech Electronics .

Wednesday, 21 May 2014 06:41

पहले जो कलियाँ खिलती थी कभी अब वो खिलती क्यूँ नही

अब किसी खुशी से परिचय होता क्यूँ नही ,

रूत भी वही है , फिजा भी वही है

मैं तो यहाँ हूँ पर मेरा अक्स और कहीं है ।

शायद वो तुझमे था समाया ,

जब मैंने अपने आप को तन्हा था पाया ।

कुछ वीराना सा था वो पल ,

जिसका साया छाया है मुझ पर आजकल ।

उफ़्फ़ तेरे बेदर्द दिल के दरिया का किनारा ,

जो मुझे न दे सका कभी सहारा ।

Nikhil Uprety

I am a 35 years old MBA working as Asst. Professor with Shoolini University of Biotechnology & Management Sciences in Solan, a town in Himachal Pradesh. Right from my childhood i have been... Read More

Monday, 19 May 2014 08:08

ज़रा सी बात करनी थी सियासत पर उतर आए,

वो चेहरे फैंक कर असली शराफ़त पर उतर आए....

परिंदों को भी मेरे घर का पानी याद है शायद,

मुहल्ला छोड़ के सारा मेरी छत पर उतर आए.....

उन्हे मेरी ज़रूरत है मुझे शक है कहीं इतना,

Balpreet Kaur

Assistant Editor (Features) & Entertainment Head                 Day & Night News, Chandigarh  - April 2009 – Present                                        ... Read More

Thursday, 15 May 2014 11:10

कुछ कवितायें हैं मेरी

इधर उधर बिखरी पड़ी हैं

कहीं कहाँ कौन सी,

किस मौसम में मेरी उंगलियों से सरक कर पन्नों में सिमट गयी,

हिसाब नहीं है कहीं.

कुछ हैं जो किसी दिन आँखों से बह कर

Dr. Shaista Irshad

Visiting Faculty         Department of Humanities and Social Sciences.     Motilal Nehru National Institute of Technology Allahabad

Friday, 06 June 2014 07:32

लो मैं ऐतराफ् करती हू

मुझे तुमसे मुहब्बत है

मुहब्बत से कहीं ज़्यादा

जहाँ इश्क़ की सरहद है

उसके भी बहोत आगे

मेरी चाहत है..जो बेहद है...

तेरे इक़रार से पहले

तेरे इनक़ार क बाद

हर लम्हा तुझे चाहा है

पूजा है सराहा है

इबादत से बहोत ज़्यादा

जहाँ बंदगी की सरहद है

उसके भी बहोत आगे

मेरी चाहत है...जो बेहद है...

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