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Balpreet Kaur

Balpreet Kaur

Assistant Editor (Features) & Entertainment Head                

Day & Night News, Chandigarh 

- April 2009 – Present                                                

Hindustan Times                                               

Features Editor                                

- April 2000 – June 2008 Chandigarh                          

The Indian Express                                       

Worked as a Features Sub-Editor & reporter/ writer.

Personal Detail

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कुछ कवितायें हैं मेरी

इधर उधर बिखरी पड़ी हैं

कहीं कहाँ कौन सी,

किस मौसम में मेरी उंगलियों से सरक कर पन्नों में सिमट गयी,

हिसाब नहीं है कहीं.

कुछ हैं जो किसी दिन आँखों से बह कर

Thursday, 15 May 2014 11:04

अक्टूबर ५

सोचा सब खाली कर दूं,

अपने अन्दर की अलमारी,

बीते साल धो डाले,

यादें दान में दे डालीं

और कुछ सूखे पत्ते और मेरी diary के नम पन्ने

खिड़की पर बिखेर दिए, दानों की तरह...

Thursday, 15 May 2014 10:44

एक बार फिर...

मेरी दोस्त कहती है मैं मैं नहीं रही

मैने  उसका हाथ अपने हाथ में लिया

और उसके कानों  में धीरे से कहा

मैं जानती हूँ दोस्त

मैं मैं नहीं हूँ इस वक़्त,

अपनी रूह की लकीर से दूर जा बैठी हूँ कहीं;

बीते सालों के जो भी पन्ने हैं मुझ में बसी डाइयरी के

सभी इस वक़्त तेज़ किसी तूफान से बिखरे हैं आसपास,

कुछ मोती जो चुने थे सालोंसे,

वो भी एक झटके से बिखर गये हैं आसपास की ढलानों में…