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Thursday, 21 August 2014 16:34

होगा हिंदुस्तान नया

Pawan Mishra Written by 
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होगा हिंदुस्तान नया

पलट जायेगा तख़्त तुम्हारा 
रक्त अगर हुंकारेगा 
महक उठेगी धरती फिर से 
वक़्त अगर स्वीकारेगा

पिघल उठेगी सत्ता की गलियां 
फिर चाँद सितारों से 
जब जब लहू उबल उठेगा 
फिर से लाख हजारों में

स्वाति की बूंदों को पीने 
फिर चातक पगलायेंगे 
सुलग उठेगी चिंगारी जब
हम ललकार उठाएंगे

हर पल कल कल दिल में हलचल 
फिर से है ईमान जगा
हर दिल थम थम फिर से करतल 
करते करते रात जगा

कहते कहते सहते सहते 
कितनी काली रत घटी
हर पल मौसम फिर बदलेगा 
ऐसे मन में आस जगी

अपनी मिटटी की रक्षा को 
फिर वो हाथ उठाएंगे 
फिर लहराएगा वो झंडा 
केसरिया फहराएंगे

अमन चैन की नींद सो सके 
ऐसा सपना बुनते हैं 
देशभक्ति की ज्वाला बरसे 
ऐसे माला जपते हैं

 

नित दिन किसी दिन छम छम होगी 
उमड़ेगा तूफ़ान नया 
फिर से प्रेम की धरती होगी 
होगा हिंदुस्तान नया …. .................पवन मिश्रा

Read 1901 times Last modified on Tuesday, 27 January 2015 07:53
Pawan Mishra

व्यवसाय से यांत्रिक अभियंता और चुनाव से कवि एवं लेखक होना मात्र संयोग नहीं...
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