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Friday, 06 June 2014 07:32

बेहद है

Dr. Shaista Irshad Written by 
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लो मैं ऐतराफ् करती हू

मुझे तुमसे मुहब्बत है

मुहब्बत से कहीं ज़्यादा

जहाँ इश्क़ की सरहद है

उसके भी बहोत आगे

मेरी चाहत है..जो बेहद है...

तेरे इक़रार से पहले

तेरे इनक़ार क बाद

हर लम्हा तुझे चाहा है

पूजा है सराहा है

इबादत से बहोत ज़्यादा

जहाँ बंदगी की सरहद है

उसके भी बहोत आगे

मेरी चाहत है...जो बेहद है...

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Dr. Shaista Irshad

Visiting Faculty         Department of Humanities and Social Sciences.     Motilal Nehru National Institute of Technology Allahabad

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