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Wednesday, 21 May 2014 06:41

तुझसे एक शिकायत है .......

Vishal Kumar Maurya Written by 
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पहले जो कलियाँ खिलती थी कभी अब वो खिलती क्यूँ नही

अब किसी खुशी से परिचय होता क्यूँ नही ,

रूत भी वही है , फिजा भी वही है

मैं तो यहाँ हूँ पर मेरा अक्स और कहीं है ।

शायद वो तुझमे था समाया ,

जब मैंने अपने आप को तन्हा था पाया ।

कुछ वीराना सा था वो पल ,

जिसका साया छाया है मुझ पर आजकल ।

उफ़्फ़ तेरे बेदर्द दिल के दरिया का किनारा ,

जो मुझे न दे सका कभी सहारा ।

मेरी कश्ती थी उसमे डूबी ,

फतह-ए-इश्क थी जिसकी खूबी ।

जब तूफान आए ,तो उन किनारो को साहिल समझा हमने ,

जब मेरे हौसले डगमगाने लगे ,तब उन किनारो को दी आवाज़ हमने ।

पर फिर किसी आवाज ने मेरे दिल के दर्द को पनाह न दी ,

ऐसा लगा मैंने खुद की आवाज़ खो दी ।

फिर भी एक आवाज फिजा मे गूंज रही थी ,

फतह -ए-इश्क का पैगाम लिए घूम रही थी ।

जिन किनारो के दिल्लगी पर हमे ऐतबार था ,

वो दिल्लगी दगेबाज़ थी

अब जो मैं सुन रहा था

वो मेरी ही आवाज थी.......वो मेरी ही आवाज थी ...

Read 1691 times Last modified on Wednesday, 21 May 2014 09:45
Vishal Kumar Maurya

Myself Vishal Kumar Maurya , presently studying in Zakir Husain Delhi college, University of Delhi for the course B.Tech Electronics .

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