Log in| Register

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

Create an account

Fields marked with an asterisk (*) are required.
Name *
Username *
Password *
Verify password *
Email *
Verify email *
Monday, 19 May 2014 08:08

ज़रा सी बात

Nikhil Uprety Written by 
Rate this item
(10 votes)

 

ज़रा सी बात करनी थी सियासत पर उतर आए,

वो चेहरे फैंक कर असली शराफ़त पर उतर आए....

परिंदों को भी मेरे घर का पानी याद है शायद,

मुहल्ला छोड़ के सारा मेरी छत पर उतर आए.....

उन्हे मेरी ज़रूरत है मुझे शक है कहीं इतना,

मैं जब पहुंचा तो सारे लोग ख़िदमत पर उतर आए....

ये बच्चे हैं इन्हे चीज़ों की कीमत से नहीं मतलब,

खिलौना देख कर फिर से शरारत पर उतर आए....

हुई अब रात तुम कोशिश करो घर लौट जाने की,

कहीं ऐसा न हो की बात सोहबत पर उतर आए.

Read 2166 times Last modified on Monday, 19 May 2014 12:10
Nikhil Uprety

I am a 35 years old MBA working as Asst. Professor with Shoolini University of Biotechnology & Management Sciences in Solan, a town in Himachal Pradesh. Right from my childhood i have been...
Connect to Author

Today's Read