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Saturday, 17 May 2014 12:08

वो याद बड़ी गर्वीली थी

Pawan Mishra Written by 
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उस रात की सुबह बड़ी सुनहरी थी

मैंने देखा उस की खूब सूरती को

वो बहुत खूब सूरत थी

उस रात को चाँद आधा था

मैंने देखा उसमें दाग को

वो दाग बड़ा खूबसूरत था

उस रात को हम न सोये थे

हमने देखा उसे वो चारों ओर थी

वह सचमुच बहुत खूबसूरत थी

उस रात को तारे अगणित थे

मैंने देखा एक तारे को

वह तारा बहुत चमकीला था

उस रात को ठंडी हवा थी चल

मैंने देखा तुममें उसकी छवि थी

वह छवि बड़ी शर्मीली थी

उस रात को थी बेचैनी भी

मैंने देखा उसको दर्पण मैं

वो शक्ल ज़रा सी सहमी थी

उस रात को पौधे सोये थे

मैंने देखा उनकी मासूमियत को

वो सचमुच बहुत मासूम थे

उस रात को आँखें नम थी मेरी

मैंने देखा तेरी आँखों में

वो दर्द बड़ा ही मीठा था

उस रात को दुनिया सोई थी

मैं जागा था तू खोई थी

वो नींद बड़ी आनंदी थी

वो रात बड़ी ही गहरी थी

बिन बात के यूँ ही ठहरी थी

पहरों पे पहर मैं गिनता था

जब सुबह हुई मैंने देखा

पौधों से ओस टपकती थी

वो बूँद बड़ी नर्मीली थी

सोचा था याद करूँगा  न

न याद तेरी अब आएगी

देखा जब दिल के गलियारे में

वो याद बड़ी गर्वीली थी !

Read 1897 times Last modified on Saturday, 17 May 2014 12:24
Pawan Mishra

व्यवसाय से यांत्रिक अभियंता और चुनाव से कवि एवं लेखक होना मात्र संयोग नहीं...
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