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Saturday, 17 May 2014 10:58

तुम्हारे नाम का मेरे पास क्या है?

Pawan Mishra Written by 
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 तेरी यादों की चादरें जो मजारों पे चढ़ा आयेहैं

उसमे जो मोहब्बतों के फूल निकल आये हैं

उन फूलों की खुशबुको अपने दिल में संजोये हैं

तेरी चूड़ी की कसम वो खनक मेरी दिल की दुआएं हैं

तेरी नथनी की मुस्कराहट को क्या नाम दे

सरकती हुई जब टहलती है तो तेरा ही नाम कहती है

वो मंद हवाएं जब तेरी काया की हल्दी की खुशबु उड़ाती हैं

हर बिछुए की सरसराहट तेरा ही तो नाम गुनगुनाती है

वो मंगलसूत्र जो तुम्हारे गले में सहमा पड़ा है

वो मेरे जीवन की परिणीता की अभिव्यक्ति ही तो है

वो बिंदिया जिसे मेरे नाम की बताकर सजाये हो माथे पर

तुम्हारे नाम पर मेरे प्रेम का चिन्ह ही तो है

वो गोत्र जिसे तुम मेरा बताकर मोहब्बत से लगाये हो अपने नाम की आगे

वो तुम्हारे बिना असमर्थ कितना है

फिर क्या की गिला ये तुमको

की तुम्हारे नाम का मेरे पास क्या है ?

वो नाम की प्लेट घर की आगे जो सजी है

वो चिन्हिंत करती है की घर घर नहीं तुम्हारे बिना

वो करवाचौथ का व्रत जो रखे हो मेरे प्राणों की रक्षा को

मेरे जीवन का वजूद तेरी दुआओं का मोहताज है

फिर क्यों ये गिला की तुम्हारे नाम का मेरे पास क्या है ?

Read 2053 times Last modified on Saturday, 17 May 2014 11:32
Pawan Mishra

व्यवसाय से यांत्रिक अभियंता और चुनाव से कवि एवं लेखक होना मात्र संयोग नहीं...
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